अंध-भक्तों ने बरबाद कर डाला
कई सारे मेहमानों को
दार्शनिकों की एक न मान कर
सिकन्दर
अंध-भक्तों की आस्था, श्रद्धा और
विश्वास की शक्ति
या कायरता से प्रेरित
अथवा कहो दिगभ्रमित होकर
आकाश, प्रकाश और अविनाश
प्राप्ति की अभिलाषा ले कर
सनातनत्व और देशभक्ती की
महिमागान का डोल बजाते
हिन्दोस्तान के गणराज्यों में
“जय गण !”, “जय गणराज्य !”
की माला जपते
गणपतियों की गृह-प्राचीरों में
छुपे छुपाए धन को श्वेत बनाने
और देशभक्तों की तृप्ती करने
आया और
हिन्दोस्तान को रौंद कर
चला गया ।
आए कई अतिथि इस घर में
बेरंग धन को श्वेत बनाने
सोमनाथ के मन्दिर से पूछो
कितने प्रयास हुए
उस भव्य धरा पर
17 बार गज़नवी भी आया
बेरंग धन को श्वेत बनाने
हिन्दोस्तान को रौंद के वह भी
मन चाहा धन संचय कर के
गया और फिर
लौट न आया
….
अंध-भक्तों ने बरबाद कर डाला
कई सारे मेहमानों को